यदि ऋण किस्त का भुगतान कार्यालय समय के अंदर-अंदर प्रत्येक माह की 10 तारीख तक नहीं किया जाता है तो देय किस्त की राशि पर 3 प्रतिशत की दर से पीनल ब्याज लगता है।
यदि सदस्य के ऋण की एक किस्त का भुगतान भी रूक जाता है तो संबंधित सदस्य डिफाल्टर हो जाता है।
डिफाल्टर सदस्य को सोसायटी द्वारा नोटिस जारी किया जाता है जिसका डाक-व्यय सदस्य को ही वहन करना होता है।
यदि सदस्य का ऋण अनियमित होता है तो उसे वसूली हेतु दिल्ली सरकार के संबंधित विभाग को भेज दिया जाता है। यदि एक बार यह मामला वसूली के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय को प्रेषित हो जाता है तो वसूली की कार्यवाही के कारण ऋणी तथा जमानतियों के घर एवं कार्यालय में पुलिस की कार्यवाही होती है।
इस प्रकार की कार्यवाही से सदस्यों के मान-सम्मान को ठेस लगने के साथ-साथ अपमानजनक मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पडता है।
वसूली के मामले आरंभ होने के बाद ऋणी तथा अन्य संबंधितों के विरूद्ध वारंट जारी हो जाता है जिसके उल्लंघन पर नियमों के अंतर्गत न्यायिक हिरासत के साथ-साथ चल-अचल संपत्तिा की बिक्री के लिए डिक्री भी पारित होती है।
ख. जमानती होने के कारण डिफाल्टर
यदि कोई सदस्य अपने ऋण का भुगतान नियमित रूप से नहीं करता है तो ऐसे मामले वसूली के लिए दिल्ली सरकार को भेज दिए जाते हैं।
वसूली की कार्यवाही के कई चरण होते हैं। जब जमानती से भी ऋण वसूली के आदेश जारी हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में संबंधित सभी जमानती अपने आप डिफाल्टर हो जाते हैं।
वसूली की कार्यवाही में जमानतियों के घर एवं कार्यालय में भी पुलिस की कार्यवाही हो जाती है। जिसकारण जमानती के मान-सम्मान को ठेस लगने के साथ-साथ अपमानजनक मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पडता है।
वसूली के मामले में जमानती के विरूद्ध भी वारंट जारी होता है जिसके उल्लंघन पर नियमों के अंतर्गत न्यायिक हिरासत के साथ-साथ चल-अचल संपत्तिे की बिक्री के लिए डिक्री भी पारित होती है।